किसान आंदोलन: मंच पर रोने लगे राकेश टिकैत, दी फांसी लगाने की धमकी

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद धीरे धीरे किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ने लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि चार किसान संगठनों ने अपना धरना खत्म कर दिया है। लेकिन कल किसान नेता राकेश टिकैत की आंखों से गिरे आंसुओं के बाद आंदोलन में यू टर्न आता दिख गया। इसके बाद माहौल बदल गया।

गाजियाबाद प्रशासन ने प्रदर्शनकारी किसानों को गुरुवार आधी रात तक यूपी गेट खाली करने का अल्टीमेटम दिया था और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। गाजीपुर बॉर्डर गुरुवार को एक तरह से छावनी में तब्दील हो गई थी। बड़ी तादाद में पुलिस के जवान और रैपिड ऐक्शन फोर्स के जवान तैनात थे। गाजीपुर बॉर्डर इलाके में धारा 144 लगा दी गई। ऐसी संभावना थी कि राकेश टिकैत सरेंडर कर सकते हैं या पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी।
लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनकी भावुक अपील के बाद माहौल बदल गया और पुलिस फोर्स को देर रात बैरंग वापस लौटना पड़ा।

राकेश टिकैत ने आंखों में आंसू लिए मीडिया से कहा, ‘मेरे किसान को मारने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी के विधायक यहां 300 लोगों के साथ लाठी डंडे लेकर आए हैं।
सरकार किसानों से जगह खाली करने का दवाब बना रही है लेकिन मैं यहां से खाली नहीं करूंगा। ये वैचारिक लड़ाई है। किसानों के साथ अत्‍याचार किया जा रहा है। हमें मारने की साजिश की जा रही है। लेकिन मैं आज मैं सबके सामने कहता हूं कि अगर कानून वापस नहीं हुआ तो मैं आत्‍महत्‍या कर लूंगा।

इसके पहले धरना स्थल पर बिजली और पानी की सप्लाई रोकने पर टिकैत ने कहा था कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है। इसके पीछे की मंशा को जाहिर करे। टिकैत ने कहा था कि किसानों को गिरफ्तार करने के लिए सरकार दमककारी नातियों को अपना रही है।

बता दे 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में जो हुआ उसे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने देखा है। किसान ट्रैक्टर रैली की आड़ में उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। आलम ये था कि बवाल में 300 से भी ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। चौतरफा किरकिरी होती देख कई किसान नेताओं ने आंदोलन का साथ छोड़ दिया।

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