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2021 का आम बजट होगा बेहद खास, लोगों को इस बजट से है उम्मीदें। 

इस साल का आम बजट एक फरवरी 2021 को पेश होगा। इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के चलते 2020 में सभी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। बीते साल लॉकडाउन की वजह से जहां डिमांड बेहद कमजोर हुई, बहुत से लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी है। जॉब और इम्‍प्‍लॉयमेंट के मामले में भी अभी भी स्थिति नॉर्मल नहीं हुई है। 
भारतीय जीडीपी में ऐतिहासिक संकुचन के साथ आर्थिक रूप से सुदृढ़ पड़ोसी से सीमा पर तनाव के चलते वित्तमंत्री से एक ऐसा बजट पेश करने की उम्मीद की जा रही है जो अब तक कभी पेश नहीं हुआ। 
इस साल कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर बजट की छपाई नहीं हो रही है। इसके बजाय इस बार सांसदों को बजट दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में दिए जाएंगे। अभूतपूर्व पहल के तहत केंद्रीय बजट 2021-22 पहली बार डिजिटल तरीके से लोगों को मिलेगा। 
वैसे 2021 का बजट कैसा होगा, इसे समझाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, इस बार का बजट इस तरह से बनाया जा रहा है, जैसा पिछले 100 वर्षों में नहीं बना होगा। हमारा आकार, हमारी जनसंख्या और हमारी क्षमता के लिहाज़ से हम कुछ दूसरे देशों के साथ विश्व की आर्थिक तरक़्क़ी के अगुआ देश बनेंगे। 

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कैसे बनता है देश का बजट
बजट बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।आम बजट में देश के सभी मंत्रालयों और विभागों में साल भर में खर्च किए जाने वाली मदों और राजस्व प्राप्ति का ब्यौरा रहता है। किन-किन योजनाओं पर साल भर में कितना खर्च करना है इसकी सभी जानकारी इस बजट में होती है। रेल बजट पहले आम बजट का ही हिस्सा होता था लेकिन जब रेल बजट, आम बजट के लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया तो इस पर व्यापक ध्यान देने के लिए रेल बजट को आम बजट से अलग कर दिया गया। आम बजट में एक वित्तीय वर्ष यानि 1 अप्रैल से 31 मार्च का लेखा जोखा होता है।
कैसा हो सकता है 2021 का आम बजट
अर्थशास्त्रियों के बीच रॉयटर्स के किए गए एक सर्वे के अनुसार 31 में से 18 अर्थशास्त्रियों ने कहा कि भारत में 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट अगले वित्त वर्ष में देश की आर्थिक रिकवरी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। 50 से अधिक अर्थशास्त्रियों पर किए गए इस सर्वे में यह पता चला है कि भारत अगले वित्त वर्ष में 9.5% के हिसाब से ग्रो कर सकता है।
असल में भारत ने आंकड़ों के हिसाब से भी अब तक के सबसे कमजोर साल का सामना किया है, जो कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित रहा है। महामारी के शुरुआती महीनों से जून तक आर्थ‍िक गतिविधि‍यों में भारी गिरावट आई, इसके बाद सितंबर के बाद धीरे-धीरे इसमें सुधार हुआ। 
अभी की स्थितियों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का सबसे बड़ा हिस्सा देश पर आई इस सबसे बड़ी विपदा की चुनौतियों और उससे निपटने में सरकार की कोशिशों के बारे में बताने में ही जाने वाला है। 
वैसे नरेंद्र मोदी सरकार का पिछला और लगभग सभी बजट गाँव और किसान को ध्यान में रखकर ही बनाए गए दिखते हैं। सरकार कृषि क्षेत्र के लिये हर साल कर्ज का लक्ष्य बढ़ाती रही है। इस बार किसान बिल की वजह से किसान खफा हैं और सड़कों पर उतरे हुए हैं, ऐसे में उन्हें खुश करने के लिए सरकार कुछ और भी बड़ा कर सकती है। 

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वित्त वर्ष 2020-21 के लिये कृषि कर्ज का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। इस बार भी 2021-22 के लिये लक्ष्य को बढ़ाकर करीब 19 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। 
बजट को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता आम टैक्स-पेयर्स को रहती है। हर वित्त वर्ष का बजट जब पेश करने से पहले इनकम टैक्स में छूट की मांग तेज हो जाती है। कोरोना संक्रमण की वजह से अर्थव्यवस्था पर काफी काफी बुरा असर पड़ा है। डायरेक्ट और इन डायरेक्ट टैक्स से होने वाली सरकार की आय में कमी आई है। ऐसे में क्या सरकार के लिए टैक्स में छूट देना संभव होगा। 
खैर, क्या बढ़ता है और क्या नहीं, ये तो बजट वाले दिन पता चलेगा। 
आम बजट का इतिहास
देश का पहला बजट साल 1947 में पेश हुआ था। 26 नवंबर 1947 को आरके शनमुखम शेट्टी ने आजाद भारत का पहला बजट पेश किया था। हालांकि यह पूर्ण बजट नहीं था। अब तक सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाले मंत्रियों में मोरारजी देसाई का नाम शामिल है। उन्होंने 10 बार बजट पेश किया था। मोरारजी देसाई के बाद पी चिदंबरम ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने आठ बार बजट पेश किया है। प्रणब मुखर्जी, यशवंत सिन्हा, वाईबी चौहान और सीडी देशमुख ने सात बार बजट पेश किया था।

 

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