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नेपाल के श्मशान घाट में कोविड मौतों से निपटने के लिए ओवरटाइम करते हैं कार्की।

Image Courtesy: Nepali Times

 

नेपाल, काठमांडू के सुभाष कार्की, जो पवित्र भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के पास बागमती नदी के किनारे पिछले तीन वर्षों से शवों के दाह संस्कार की देखरेख कर रहे हैं।
लेकिन एक साल पहले पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट द्वारा संचालित विद्युत शवदाह गृह के मुख्य संयोजक नियुक्त कार्की ने अपने कभी नहीं सोचा था कि वह दिन-रात शवों का अंतिम संस्कार करेंगे।
कोविड-19 से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है इसलिए वो हर समय काम करते रहते हैं। सुबह 6 बजे से दिन 11 बजे तक शवों के प्रबंधन में लगे रहते हैं।
कार्की ने सिन्हुआ को बताया, “मैंने शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए तीन महीने के लिए अतिरिक्त जनशक्ति को काम पर रखा है और वे पाली में काम करते हैं। वे वहां एक दिन की सुबह से दूसरे दिन सुबह तक काम करते हैं।”
एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट पशुपति के अनुसार, तीन मशीनें हैं – दो इलेक्ट्रिक और एक लकड़ी की चिता से जुड़ी हाइब्रिड – जो श्मशान घाट में दिन-रात काम कर रही हैं।

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विकास न्यास के सदस्य सचिव प्रदीप ढकाल ने कहा, “मशीनों के लगातार गर्म होने से शवों को जलाने के लिए हमें समय-समय पर मशीनों का संचालन बंद करना पड़ता है ताकि मशीनें खराब न हों।”
सामान्य समय में अधिकतम 18 शवों को विद्युत शवदाह गृह में प्रतिदिन संभाला जाता है। कार्की ने कहा, “अब हम तीनों मशीनों का इस्तेमाल कर 30 से 40 शवों को जला रहे हैं।”
हाल के दिनों में, हर दिन 90 से अधिक शवों को श्मशान घाट भेजा जाता है, जिससे सुविधाओं को उनकी सीमा तक सीमित कर दिया गया है।
पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट ने इलेक्ट्रिक श्मशान घाट के पास बागमती बैंक के किनारे लकड़ी की 10 नई चिताएं पहले ही लगा दी हैं। कार्की ने कहा, “चौंतीस नई लकड़ी की चिताएं तैयार की जा रही हैं।”
एक सप्ताह से अधिक समय से, नेपाल में 8,000 से अधिक नए कोरोनोवायरस मामले सामने आए हैं, अधिक मौतें अस्पतालों में बिस्तर और ऑक्सिजन की कमी से हो रही है।
“पिछले मंगलवार को, कार्की को 110 शवों के दाह संस्कार का प्रबंधन करना था, जो कि एक दिन में अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी।”
सरकारी नियमों के तहत, जो लोग कोविड-19 से मरते हैं और उन्हें पशुपति मंदिर क्षेत्र में लाया जाता है, उनका अंतिम संस्कार केवल विद्युत शवदाह गृह में किया जाएगा। अन्य कारणों से मृत लोगों का अंतिम संस्कार मंदिर के पास लकड़ी की चिता पर किया जा रहा है।

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मार्च की शुरुआत तक, नेपाल में कोविड-19 मामलों और मौतों में भी भारी कमी आई थी, मृत्यु दर लगभग शून्य हो गई थी, लेकिन वायरस के एक ताजा प्रकोप के बाद चीजें बदतर हो गयी हैं।
काठमांडू घाटी से अधिकांश शवों को भगवान पशुपतिनाथ से आशीर्वाद लेने के लिए अंतिम संस्कार के लिए पशुपति क्षेत्र में लाया जाता है।
कार्की के परिवारवालों को हमेशा ये डर रहता ह की कहीं वो वायरस से संक्रमित न हो जाए क्योंकि उन्हें शवों के करीब रहना होता है। कार्की अपनी पत्नी, बेटे, मां, एक बड़े भाई और बहनों के साथ रहते हैं।
कार्की ने कहा “मेरे परिवारवाले मुझे नौकरी छोड़ने के लिए कह रहे हैं,”। “लेकिन मैं एक बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा हूं जिसे मुझे पूरा करने की जरूरत है।”

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