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नेपाल के पशुपतिनाथ शमशान में लाशों की भीड़, कोविड से हुए हालात बेकाबू।

Image Courtesy: CNN

 

नेपाल में कोरोनावायरस के कुल मामलों की संख्या 431,191 है। और अबतक 4,446 लोगों की मौत हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार,नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े श्मशान में कोविड-19 रोगियों के शवों की भीड़ लगी रहती है।
पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट के मैनेजर कार्की ने कहा, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह दिन-रात शवों के अंतिम संस्कार में जुटे रहेंगे।
कोविड-19 से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है इसलिए वो हर समय काम करते रहते हैं। पशुपति शमशान में इतनी लाशें पहले कभी नहीं जलाई गयीं।
वर्तमान में नेपाल में हर दिन 9,000 से अधिक नए मामले आ रहे हैं।कोविड की दूसरी लहर युवाओं को चपेट में ले रही है।
नेपाल की स्थिति के लिए भारत कितना जिम्मेदार?
नेपाल की इस गंभीर स्थिति के लिए भारत को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है क्योंकि दोनों देशों की सीमाएं खुली हुई हैं आने जाने में कोई रोक टोक नहीं है। नेपाल के कई लोग भारत में काम करते हैं ,और दोनों देशों में उनका आना जाना लगा रहता है। काठमांडू का सबसे प्रभावी इलाका बांका जिले का नेपालगंज शहर उत्तर प्रदेश की सीमा से बहोत नजदीक है। हाल ही में भारत के साथ लगे कई बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया गया है। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रोक दी गई हैं।

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नेपाल सरकार की लापरवाही।
काठमांडू घाटी के तीन जिले सहित नेपाल के 40 से अधिक जिलों में पिछले दो सप्ताह से नियम व शर्तें लागू है। लगभग नेपाल में लॉकडाउन लगा हुआ है फिर भी हर घर में एक मरीज है और नेपाल का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की ही तरह गंभीर स्थिति में है। लोगों को न बेड मिल रहा है ना ऑक्सिजन। हालात बेकाबू हो गए हैं। इसके अलावा देश का वैक्सीनेशन दर भी बहोत कम है।
परिजनों का कहना है कि ऑक्सिजन न होने के कारण उनके अपने उनसे छिन गए। ऑक्सिजन निर्माता स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी दिए बिना किसीको ऑक्सिजन नहीं दे रहे हैं क्योंकि सरकार ने उन्हें बाध्य किया है, इसपर सरकार का कहना है कि ऑक्सिजन आपूर्ति सही ढंग से हो पाए इसलिए चिट्ठी आवश्यक है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों ने इसका विरोध किया है।

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प्रधानमंत्री ओली को कई आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, जिसके कारण हैं –
1) सबसे पहले कोरोना की स्थिति पर पर्दा डालने की कोशिश।
2)अप्रैल में हालात बिगड़ने पर देशवासियों को घरेलू उपायों का सलाह देना।
3)ये सुनिश्चित करना कि निपालियों की इम्युनिटी काफी स्ट्रांग है।
4)धार्मिक आयोजनों के लिए बड़ी संख्या में अनुमति देना।
5)माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की अनुमति देना।
इन आलोचनाओं के बाद अब सरकार ने जरूरी फैसले लेने शुरू किए हैं। जैसे- 10वी और 12वी की परीक्षाएं स्थगित कर दी गयी हैं, लॉकडाउन को अगले आदेश तक बढ़ाया गया है, कई डॉक्टरों को कोविड मरीजों के इलाज के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है, दूसरे देशों से ऑक्सिजन सिलिंडर औऱ अन्य मेडिकल उपकरण इम्पोर्ट करने के लिए सरकार बातचीत कर रही है, नेपाल को मदद की सख्त जरूरत है और वो अंतरराष्ट्रीय मदद माँग रहे हैं क्योंकि नेपाल के पास सुविधा नहीं है।
क्यों है नेपाल को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत?
काठमांडू का ऑक्सिजन प्लांट एक दिन में करीब 8000 ऑक्सिजन सिलिंडर उत्पादन कर रहा है जो उनकी मांग की क्षमता से कम है।
रॉ मैटेरियल के लिए नेपाल भारत पर निर्भर है जबकि भारत खुद इन मुश्किलों से जूझ रहा है।
दूसरे देशों से ऑक्सिजन सिलिंडर औऱ अन्य मेडिकल उपकरण इम्पोर्ट करने के लिए सरकार बातचीत कर रही है, नेपाल को मदद की सख्त जरूरत है और वो अंतरराष्ट्रीय मदद माँग रहे हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के विश्वास मत हारने के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता आ गयी है औऱ आर्थिक रूप से भी नेपाल संकट में जा रहा है।

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